"डाक'साब, नमस्ते"
नमस्ते, नमस्ते। आईये, बैठिये।
"डाक'साब, लगता है आपने मुझे पहचाना नहीं"
ह्म्म्म...याद तो नहीं आ रहा। आप पहले भी क्लीनिक में आ चुके हैं क्या?
"अरे डाक'साब, मैं पिछले साल आया था ना आपके पास, इलाज के लिये"
अच्छा, क्या हुआ था?
"मुझे हल्का सा बुखार नहीं था? जिसका इलाज आपने किया था"
अच्छा, बिल्कुल भी याद नहीं आ रहा। खैर बताईये, अब कैसे आना हुआ? फ़िर कोई तकलीफ़ है क्या?
"नहीं नहीं डाक'साब, अब तकलीफ़ तो बिलकुल नहीं है।"
फ़िर?
"आपने तब स्नान करने को मना किया था, बस यही पुछना था कि मै अब कर लुँ क्या??"
.........!!!
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Thursday, July 09, 2009
Thursday, June 25, 2009
एक नॉनवेज जोक
एक बार एक हैण्डसम, उँचे कद का हष्टपुष्ट जवान अपनी कार से घुमते हुए एक कस्बे में आ पहुँचा।
वह युवक उस कस्बे के एकमात्र पब-रेस्त्रां में जा पहुँचा।
वहाँ एक टेबल पर बैठने के बाद उसने देखा कि रेस्त्रां में सिर्फ़ महिलाएं ही महिलाएं हैं।
और वह थोड़ा परेशान हो गया क्योंकि सब उसे ही घूर घूर करे देख रहीं थीं।
उसे थोड़ा अजीब लगा। फ़िर उसने वेटर को आवाज़ लगाई। जो वेटर आया उसे देखकर उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह गई।
इतनी बला की खुबसूरत और परफ़ेक्ट फ़िगर वाली लड़की उसने आज तक नहीं देखी थी।
उस युवक से रहा नहीं गया, उसने वेटर से इशारों में ही पुछ लिया कि "यहाँ और क्या मिलेगा?"
वो लड़की अपनी मदभरी चाल से युवक के पास आई, और नीचे झुकी और उसके कानों फ़ुसफ़ुसाई-
:
:
चिकन मसाला
चिकन टिक्का मसाला
चिकन दो प्याज़ा
चिकन हैदराबादी
चिकन पटियाला
चिकन सागवाला
मुर्ग मुस्सलम
बटर चिकन मसाला
चिकन मंचुरियन
चिकन शामीकबाब
तंदूरी चिकन
चिकन टंगड़ी कबाब
चिकन बिरयानी
चिली चिकन
चिकन लालीपॉप
:
:
:
:
इतना ही नहीं, वेटर ने युवक को मटन और फ़िश की भी डिशेज़ बताई।
(सच सच बताना - किस किस के मुँह में पानी आया?)
(अभी खाना खाते खाते ही बनाया हैं)
वह युवक उस कस्बे के एकमात्र पब-रेस्त्रां में जा पहुँचा।
वहाँ एक टेबल पर बैठने के बाद उसने देखा कि रेस्त्रां में सिर्फ़ महिलाएं ही महिलाएं हैं।
और वह थोड़ा परेशान हो गया क्योंकि सब उसे ही घूर घूर करे देख रहीं थीं।
उसे थोड़ा अजीब लगा। फ़िर उसने वेटर को आवाज़ लगाई। जो वेटर आया उसे देखकर उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह गई।
इतनी बला की खुबसूरत और परफ़ेक्ट फ़िगर वाली लड़की उसने आज तक नहीं देखी थी।
उस युवक से रहा नहीं गया, उसने वेटर से इशारों में ही पुछ लिया कि "यहाँ और क्या मिलेगा?"
वो लड़की अपनी मदभरी चाल से युवक के पास आई, और नीचे झुकी और उसके कानों फ़ुसफ़ुसाई-
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चिकन मसाला
चिकन टिक्का मसाला
चिकन दो प्याज़ा
चिकन हैदराबादी
चिकन पटियाला
चिकन सागवाला
मुर्ग मुस्सलम
बटर चिकन मसाला
चिकन मंचुरियन
चिकन शामीकबाब
तंदूरी चिकन
चिकन टंगड़ी कबाब
चिकन बिरयानी
चिली चिकन
चिकन लालीपॉप
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इतना ही नहीं, वेटर ने युवक को मटन और फ़िश की भी डिशेज़ बताई।
(सच सच बताना - किस किस के मुँह में पानी आया?)
(अभी खाना खाते खाते ही बनाया हैं)
Friday, May 29, 2009
समझ का फ़ेर: चुटकुला
एक आदमी डॉक्टर के पास पहुँचा और बोला -
आदमी: डॉक्टर डॉक्टर, मेरी मदद कीजिये, मेरी आवाज में थोड़ी प्राब्लम है।
डॉ.: बताओ, क्या बात है?
आदमी: डॉक्टर, बात ये है कि मैं फ़ को फ़ बोलता हूँ।
डॉ.: अरे! यह कैसी परेशानी हुई? सभी लोग तो फ़ को फ़ बोलते हैं।
आदमी: अरे डॉक्टर, औरों का मुझे क्या पता, पर मैं तो फ़ को फ़ बोलता हूँ।
डॉ.: अरे! अजीब आदमी हो, मैं बोल तो रहा हूँ कि हर कोई फ़ को फ़ ही बोलता है।
आदमी: अरे ओ डॉक्टर, मैं बोल रहा हूँ कि मैं-फ़-को-फ़ बोलता हूँ।
डॉ.: हे भगवान, इसे कैसे समझाउँ? अरे! भले मानस, सब लोग फ़ को फ़ बोलते हैं, मैं फ़ को फ़ बोलता हूँ, और तो और तुम भी फ़ को फ़ ही बोल रहे हो।
:
:
आदमी: अरे डॉक्टर फ़ाहब, मैं कब फ़े फ़मझा रहा हूँ, आप तो फ़मझने का नाम ही नहीं ले रहे। अरे माना फ़ब लोग फ़ को फ़ बोलते हैं, आप फ़ को फ़ बोलते हो...पर मैं तो फ़ को फ़ बोल रहा हूँ ना। और कैफ़े फ़मझाउँ?? आपको फ़ुनाई दे रहा होगा कि मैं फ़ को फ़ बोलता हूँ, पर मुझे तो पता है ना कि मैं फ़ को फ़ नहीं, फ़ बोलता हूँ, और ये मैं फ़मझ रहा हूँ कि मैं फ़ही नहीं बोल रहा हूँ। और ये इत्ती फ़ी बात आपकी फ़मझ में ही नहीं आ रही है। मैंने इतना फ़मझाया, लगता है आपकी फ़मझ में फ़िर भी नहीं आया, फ़िर फ़े फ़मझाउँ क्या??
डॉ.: @#$%$!$!$!!$!!@@#@!@!@&^*^&*!!!!
----------------------------
कुछ आपकी फ़मझ में आया???
आदमी: डॉक्टर डॉक्टर, मेरी मदद कीजिये, मेरी आवाज में थोड़ी प्राब्लम है।
डॉ.: बताओ, क्या बात है?
आदमी: डॉक्टर, बात ये है कि मैं फ़ को फ़ बोलता हूँ।
डॉ.: अरे! यह कैसी परेशानी हुई? सभी लोग तो फ़ को फ़ बोलते हैं।
आदमी: अरे डॉक्टर, औरों का मुझे क्या पता, पर मैं तो फ़ को फ़ बोलता हूँ।
डॉ.: अरे! अजीब आदमी हो, मैं बोल तो रहा हूँ कि हर कोई फ़ को फ़ ही बोलता है।
आदमी: अरे ओ डॉक्टर, मैं बोल रहा हूँ कि मैं-फ़-को-फ़ बोलता हूँ।
डॉ.: हे भगवान, इसे कैसे समझाउँ? अरे! भले मानस, सब लोग फ़ को फ़ बोलते हैं, मैं फ़ को फ़ बोलता हूँ, और तो और तुम भी फ़ को फ़ ही बोल रहे हो।
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आदमी: अरे डॉक्टर फ़ाहब, मैं कब फ़े फ़मझा रहा हूँ, आप तो फ़मझने का नाम ही नहीं ले रहे। अरे माना फ़ब लोग फ़ को फ़ बोलते हैं, आप फ़ को फ़ बोलते हो...पर मैं तो फ़ को फ़ बोल रहा हूँ ना। और कैफ़े फ़मझाउँ?? आपको फ़ुनाई दे रहा होगा कि मैं फ़ को फ़ बोलता हूँ, पर मुझे तो पता है ना कि मैं फ़ को फ़ नहीं, फ़ बोलता हूँ, और ये मैं फ़मझ रहा हूँ कि मैं फ़ही नहीं बोल रहा हूँ। और ये इत्ती फ़ी बात आपकी फ़मझ में ही नहीं आ रही है। मैंने इतना फ़मझाया, लगता है आपकी फ़मझ में फ़िर भी नहीं आया, फ़िर फ़े फ़मझाउँ क्या??
डॉ.: @#$%$!$!$!!$!!@@#@!@!@&^*^&*!!!!
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कुछ आपकी फ़मझ में आया???
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