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Tuesday, July 07, 2009

क्या आपने कहीं ऐसा होते देखा है? - जवाब

वैसे तो वह कोई पहेली नहीं थी, और ना ही कोई इनाम-शिनाम मिलने वाला था।
पिछली पोस्ट में तो सिर्फ़ इनाम कि घोषणा के बारे में ही लिखा था। :)

इस कहानी की प्रेरणा मुझे अपने देश पर बारंबार आतंकवादी हमले होते हुये, भारत सरकार के रवैये, पाकिस्तान के जवाब, भारत की अमेरिका से शिकायत/मदद की गुहार और उस पर मिलते हुये आश्वासन और निर्देशों को देख कर मिली।

खैर इस विषय पर क्या कहें और कितना कहें?
जो हो रहा है, जैसा चल रहा है उसे देख सुन कर मन थक सा गया है।

चलो, आप लोगों को अब तो उस कहानी के पात्र समझ आ गये ना?

Thursday, July 02, 2009

क्या आपने कहीं ऐसा होते देखा है?

[उंगली]

...उँ...

[चिमटी]

...ऐ...

[चिमटी]

...ऐ...ऐ...

[चिमटी]

...ओए..अब मत करियो...

[चिमटी]

...अबे...अब करेगा तो देख लेना...

[चिमटी]

...अरे! फ़िर?...अब मत करना...

[चिमटी]

...अब मैं इधर ही देख रहा हूँ, अब कर के दिखा...

[चटाक्‍]

...अब तो हद हो गई...ये लास्ट वार्निंग है...

[चटाक्‍][चिमटी]

...अब तो बहुत हो गया...ले मैं इधर तकिया लगा देता हूँ...

[पापा...देखो बडके ने मेरी जगह में तकिया लगा लिया]

पापा: बेटा बड़के, देखो ऐसा नहीं करते, हटाओ तकिया वहाँ से...और सरको वहाँ से...

[चिमटी][चटाक्‍][चिमटी]

...पापा, देखो छुटका मुझे तंग कर रहा है...इसे बोलो ना कुछ...

पापा: बेटा बड़के, तुम बड़े हो, ऐसे नहीं रोते...

[चिमटी][चटाक्‍][चिमटी]

...चल अब तक जो किया सो किया, अब आगे मत करना...वर्ना बहुत बुरा होगा...

[चटाक्‍][चिमटी][चटाक्‍][चिमटी]

...

... ...

... ... ...

... ... ... ... (ये तो यूँ ही जारी रहेगा)


नोट: पात्र पहचानने वालों को शानदार इनाम दिये जाने की घोषणा की जायेगी।

Thursday, June 18, 2009

The Last Lecture

मेरी आज की पोस्ट जो कि मेरे दूसरे ब्लाग "नून तेल लकड़ी" पर लिखी गई है।

यहा चटकाईये।