एक चैनल अपने किसी आने वाले कार्यक्रम के लिये अलग अलग खुबियों वाले कलाकार ढुँढ रहा था और अपने बीसवें माले के ऑफ़ीस में चयनकर्ता ऑडिशन ले रहा था।
एक कलाकार और चयनकर्ता के बीच की बातचीत:
कलाकार - "मैं किसी भी पक्षी की नकल उतार सकता हूँ।"
चयनकर्ता - "..पक्षियों की नकल उतारने वाले तो बहुत हैं, हमें और नहीं चाहिये। आप जा सकते हैं।"
"कोई बात नहीं, मैं कहीं और ट्राय करता हूँ" यह कहते हुए कलाकार खिड़की खोलकर बाहर उड़ गया।
Wednesday, April 08, 2009
Monday, April 06, 2009
आज के रियालिटी शो
स्टेज सजा हुआ है।
लाईट्स - धुँआ - ढेर सारे दर्शकों का शोर।
स्टेज के ठीक सामने करीब ७-८ निर्णायकगण बैठे हैं।
स्टेज संभाले हुए एंकर्स की जोड़ी।
और स्टेज पर एक कतार में खड़े हुए कई प्रतियोगी।
काफ़ी मेहनत(?) कर के ये प्रतियोगी यहाँ तक पहुँचे हैं। एक दूसरे के लिए काफ़ी उल्टा-सीधा बोल कर। एक दूसरे के खिलाफ़ खुब साज़िशें रच कर।
आज इनमें से कोई एक प्रतियोगी गेम से बाहर होने वाला है, यानि कि 'एलिमिनेट' होने वाला है। बाकी बचे हुए गेम जीत जाएंगे। रियालिटी टी।वी. की भाषा में 'ग्रेण्ड फ़िनालॆ' चल रहा है।
सारे जीते हुए प्रतियोगियों को बार बार टी।वी. पर आने का, खुब सारे टी.वी. विज्ञापन में काम करने का और ढेर सारा पैसा कमाने का सुनहरा मौका मिलेगा।
इन प्रतियोगियों से पुरे सत्र के दौरान काफ़ी सारे 'टास्क्स' करवाए गये हैं, जिनमें बहुत तरह के उट-पटांग करतब भी शामिल थे।
घर बैठे दर्शकों को भी खाली नहीं छोड़ा गया है, उनसे भारी मात्रा में 'एस।एम.एस' मंगवाए गये हैं, और इस सबसे आखिरी मुकाबले के दौरान फ़ैसला उन्हीं 'एस.एम.एस.' के आधार पर ही तो किया जाएगा। तो बस अब थोड़ी ही देर में, वह नाम लिया जायेगा जो आज इस प्रतियोगिता से बाहर होने वाला है।
एंकर्स सारे प्रतियोगियों से पुछ रहे है कि उन्होनें पुरे सत्र में क्या अच्छा किया और क्या बुरा किया। और इस 'शो' से बाहर जा कर उन्हें कैसा लगेगा?सभी का जवाब लगभग यही है कि - उन्होनें इसके लिये तैयारी तो बहुत की है, इस वक्त बाहर निकलेंगे तो बुरा तो लगेगा ही, मगर ये भी एक खेल है और इसे खेल की तरह ही लेंगे। और मानसिक रुप से पुरी तरह से तैयार हैं - चाहे फ़ैसला कुछ भी हो।
आखिरकार वो घड़ी आ गई जब वो नाम लिया गया। जो बाहर हो चुका था।
सुनते ही बचे हुये प्रतियोगियों में एकदम से हर्षोल्लास छा गया, मगर जो बेचारा बाहर हुआ है उसकी तो रुलाई फ़ुट पड़ी है।बेचारा फ़ूट-फ़ूट कर रोए जा रहा है मानो कि जिन्दगी ही खतम हो गई हो।तब तक उसके बाकी के साथी भी उसके पास आ चुके हैं। उसे गले लगा कर दिलासा दे रहे हैं। निर्णायकों में से भी कुछ-एक की आँखों में पानी साफ़ दिख रहा है।
कैमेरा बारी बारी एंकर्स, प्रतियोगियों, उनके संबंधियों, निर्णायकों, और दर्शकों के उपर से ज़ूम-इन, ज़ूम-आउट हो रहा है।
कट!!
कैसा लगा आपको ये एकदम ओरिजिनल दृश्य??जोकि आजकल के हर दूसरे-तीसरे टी।वी। सीरियल में आपको दिख रहा है। पहचाना कि नहीं?
चाहे कोई नाच प्रतियोगिता हो, या कोई गाने की, चुटकुले सुनाने की, एक साथ रहने की ही क्यों ना हो।हर जगह, हर सीरियल में यही लगता है कि 'स्क्रिप्ट' तो वही है, बस, स्टेज और कलाकार बदले हुये हैं। यहाँ तक कि डायलाग्स तक वही सुने सुनाए लगते हैं।
कट!!
अब जरा सोचिए, यही 'फ़ंडा' हर जगह इस्तेमाल होने लगे तो? लाईफ़ में कितना मजा आ जायेगा, नहीं क्या? हर कोई एस।एम.एस. करता दिखेगा।
१. भारतीय क्रिकेट टीम के सिलेक्शन में-
२. नेता चुनने में-
३. स्कूल के एडमिशन में-
४. शादी के लिये 'योग्य' वर/वधु ढुँढने में-
५. इन्हीं प्रतियोगिताओं के लिये 'निर्णायक' चुनने के लिये-
६. घरेलु नौकरों के लिये, या फ़िर उन नौकरों के मालिक/मालकिन चुनने के लिये-
अरे! अब क्या सब मैं ही सोचुंगा?
कुछ आप भी तो सोचिये....!
सोच कर हमें भी बताएं तो हमें और अच्छा लगेगा।
लाईट्स - धुँआ - ढेर सारे दर्शकों का शोर।
स्टेज के ठीक सामने करीब ७-८ निर्णायकगण बैठे हैं।
स्टेज संभाले हुए एंकर्स की जोड़ी।
और स्टेज पर एक कतार में खड़े हुए कई प्रतियोगी।
काफ़ी मेहनत(?) कर के ये प्रतियोगी यहाँ तक पहुँचे हैं। एक दूसरे के लिए काफ़ी उल्टा-सीधा बोल कर। एक दूसरे के खिलाफ़ खुब साज़िशें रच कर।
आज इनमें से कोई एक प्रतियोगी गेम से बाहर होने वाला है, यानि कि 'एलिमिनेट' होने वाला है। बाकी बचे हुए गेम जीत जाएंगे। रियालिटी टी।वी. की भाषा में 'ग्रेण्ड फ़िनालॆ' चल रहा है।
सारे जीते हुए प्रतियोगियों को बार बार टी।वी. पर आने का, खुब सारे टी.वी. विज्ञापन में काम करने का और ढेर सारा पैसा कमाने का सुनहरा मौका मिलेगा।
इन प्रतियोगियों से पुरे सत्र के दौरान काफ़ी सारे 'टास्क्स' करवाए गये हैं, जिनमें बहुत तरह के उट-पटांग करतब भी शामिल थे।
घर बैठे दर्शकों को भी खाली नहीं छोड़ा गया है, उनसे भारी मात्रा में 'एस।एम.एस' मंगवाए गये हैं, और इस सबसे आखिरी मुकाबले के दौरान फ़ैसला उन्हीं 'एस.एम.एस.' के आधार पर ही तो किया जाएगा। तो बस अब थोड़ी ही देर में, वह नाम लिया जायेगा जो आज इस प्रतियोगिता से बाहर होने वाला है।
एंकर्स सारे प्रतियोगियों से पुछ रहे है कि उन्होनें पुरे सत्र में क्या अच्छा किया और क्या बुरा किया। और इस 'शो' से बाहर जा कर उन्हें कैसा लगेगा?सभी का जवाब लगभग यही है कि - उन्होनें इसके लिये तैयारी तो बहुत की है, इस वक्त बाहर निकलेंगे तो बुरा तो लगेगा ही, मगर ये भी एक खेल है और इसे खेल की तरह ही लेंगे। और मानसिक रुप से पुरी तरह से तैयार हैं - चाहे फ़ैसला कुछ भी हो।
आखिरकार वो घड़ी आ गई जब वो नाम लिया गया। जो बाहर हो चुका था।
सुनते ही बचे हुये प्रतियोगियों में एकदम से हर्षोल्लास छा गया, मगर जो बेचारा बाहर हुआ है उसकी तो रुलाई फ़ुट पड़ी है।बेचारा फ़ूट-फ़ूट कर रोए जा रहा है मानो कि जिन्दगी ही खतम हो गई हो।तब तक उसके बाकी के साथी भी उसके पास आ चुके हैं। उसे गले लगा कर दिलासा दे रहे हैं। निर्णायकों में से भी कुछ-एक की आँखों में पानी साफ़ दिख रहा है।
कैमेरा बारी बारी एंकर्स, प्रतियोगियों, उनके संबंधियों, निर्णायकों, और दर्शकों के उपर से ज़ूम-इन, ज़ूम-आउट हो रहा है।
कट!!
कैसा लगा आपको ये एकदम ओरिजिनल दृश्य??जोकि आजकल के हर दूसरे-तीसरे टी।वी। सीरियल में आपको दिख रहा है। पहचाना कि नहीं?
चाहे कोई नाच प्रतियोगिता हो, या कोई गाने की, चुटकुले सुनाने की, एक साथ रहने की ही क्यों ना हो।हर जगह, हर सीरियल में यही लगता है कि 'स्क्रिप्ट' तो वही है, बस, स्टेज और कलाकार बदले हुये हैं। यहाँ तक कि डायलाग्स तक वही सुने सुनाए लगते हैं।
कट!!
अब जरा सोचिए, यही 'फ़ंडा' हर जगह इस्तेमाल होने लगे तो? लाईफ़ में कितना मजा आ जायेगा, नहीं क्या? हर कोई एस।एम.एस. करता दिखेगा।
१. भारतीय क्रिकेट टीम के सिलेक्शन में-
२. नेता चुनने में-
३. स्कूल के एडमिशन में-
४. शादी के लिये 'योग्य' वर/वधु ढुँढने में-
५. इन्हीं प्रतियोगिताओं के लिये 'निर्णायक' चुनने के लिये-
६. घरेलु नौकरों के लिये, या फ़िर उन नौकरों के मालिक/मालकिन चुनने के लिये-
अरे! अब क्या सब मैं ही सोचुंगा?
कुछ आप भी तो सोचिये....!
सोच कर हमें भी बताएं तो हमें और अच्छा लगेगा।
Sunday, April 05, 2009
एक दीवाना नेट पे...
एक दीवाना नेट पे,
वर्डप्रेस पे या ब्लागर पे,
लिखने का बहाना ढुंढता है, छपने का बहाना ढुंढता है।
एक दीवाना...
इस हिन्दी ब्लागिंग की दुनियाँ में अपना भी कोई ब्लाग होगा,
अपने पोस्टों पर होंगी टिप्पणियाँ, टिप्पणियों पे अपना नाम होगा,
देवनागरी के यूनिकोड फ़ोण्टों में....
देवनागरी या देवनगरी...?
देवनागरी के यूनिकोड फ़ोण्टों में लिखने का जतन वो ढुंढता है,
ढुंढता है,
लिखने का बहाना ढुंढता है, छपने का बहाना ढुंढता है।
एक दीवाना...
एक दीवाना नेट पे,
वर्डप्रेस पे या ब्लागर पे,
लिखने का बहाना ढुंढता है, छपने का बहाना ढुंढता है।
एक दीवाना...
जब सारे हिन्दी में...
सारे? और हिन्दी में?
जब सारे हिन्दी में लिखते हैं,
सारा नेट हिन्दी हो जाता है,
सिर्फ़ इक बार नहीं फ़िर वो लिखता,
हर बार लिखता जाता है,
पल भर के लिये...
पल भर के लिये...
पल भर के लिये किसी ब्लागिंग का अवार्ड भी जीतना चाहता है,
चाहता है,
लिखने का बहाना ढुंढता है, छपने का बहाना ढुंढता है।
एक दीवाना...
एक दीवाना नेट पे,
वर्डप्रेस पे या ब्लागर पे,
लिखने का बहाना ढुंढता है, छपने का बहाना ढुंढता है।
एक दीवाना...
वर्डप्रेस पे या ब्लागर पे,
लिखने का बहाना ढुंढता है, छपने का बहाना ढुंढता है।
एक दीवाना...
इस हिन्दी ब्लागिंग की दुनियाँ में अपना भी कोई ब्लाग होगा,
अपने पोस्टों पर होंगी टिप्पणियाँ, टिप्पणियों पे अपना नाम होगा,
देवनागरी के यूनिकोड फ़ोण्टों में....
देवनागरी या देवनगरी...?
देवनागरी के यूनिकोड फ़ोण्टों में लिखने का जतन वो ढुंढता है,
ढुंढता है,
लिखने का बहाना ढुंढता है, छपने का बहाना ढुंढता है।
एक दीवाना...
एक दीवाना नेट पे,
वर्डप्रेस पे या ब्लागर पे,
लिखने का बहाना ढुंढता है, छपने का बहाना ढुंढता है।
एक दीवाना...
जब सारे हिन्दी में...
सारे? और हिन्दी में?
जब सारे हिन्दी में लिखते हैं,
सारा नेट हिन्दी हो जाता है,
सिर्फ़ इक बार नहीं फ़िर वो लिखता,
हर बार लिखता जाता है,
पल भर के लिये...
पल भर के लिये...
पल भर के लिये किसी ब्लागिंग का अवार्ड भी जीतना चाहता है,
चाहता है,
लिखने का बहाना ढुंढता है, छपने का बहाना ढुंढता है।
एक दीवाना...
एक दीवाना नेट पे,
वर्डप्रेस पे या ब्लागर पे,
लिखने का बहाना ढुंढता है, छपने का बहाना ढुंढता है।
एक दीवाना...
Wednesday, March 25, 2009
माल-ए-मुफ़्त - दिल-ए-बेरहम
मैं अपने नए स्मार्टफोन के लिए कुछ हिन्दी से संबंधित जुगाड़ ढुँढते हुए इस जालस्थल तक जा पहुँचा - http://www.eyron.in.
यह कंपनी विन्डोज मोबाईल (५ व ६) प्रोफ़ेश्नल के लिए हिन्दी इन्टरफ़ेस सॉफ़्टवेअर मुहैय्या करवाती है। कंपनी के जालस्थल से ही डाउनलोड (~2mb) किया जा सकता है, और वहीं से रजिस्ट्रेशन भी किया जा सकता है। आपको इमेल के द्वारा एक एक्टिवेशन कोड दिया जाएगा जिससे कि आप यह सॉफ़्टवेअर अपने फ़ोन में इस्तेमाल कर सकें।
मैने डाउनलोड, इंस्टाल और रजिस्ट्रेशन करने के पहले जालस्थल को थोड़ खंगाला और कुछ प्रश्न मेरे अंदर कुलबुलाए। जिसके कारण मैं आगे नहीं बढा। आप भी पढिए और सोचिये:
१. मुफ़्त का सॉफ़्टवेअर, अच्छी बात है।
२. डाउनलोड भी मुफ़्त, और अच्छी बात है।
३. रजिस्ट्रेशन भी मुफ़्त, बहुत अच्छी बात है।
४. हिन्दी इन्टरफ़ेस मिलेगा - सबसे अच्छी बात है।
५. कंपनी "इज़राईल" की है....!!! आंयं!!!!??!!??!
६. सॉफ़्टवेअर इंस्टाल करने पर आपके फ़ोन पर एक युनिक कोड मिलेगा, जिसे आपको कंपनी को भेजना पडेगा - रजिस्ट्रेशन के लिये..!!??!!
६. जालस्थल पर पता और फ़ोन नंबर तो है, पर किसी भी व्यक्ति का नाम नहीं है!!!
खुरापाती सोच:
१. आपके फोन की निजी जानकारी गलत हाथों में जा सकती है।
२. आपके फ़ोन का गलत इस्तेमाल हो सकता है - आपकी जानकारी के बिना आपके फ़ोन से मैसेज भेजे जा सकते हैं और तो और काल तक किए जा सकते हैं।
३. अधिकतर स्मार्टफ़ोन्स में GPS सुविधा होती है, यानि, आपकी सही सही स्थिति का पता लग सकता है - आपकी जानकारी के बिना।
४. ..और ना जाने क्या क्या (मैं आप पर छोड़ता हूँ)
यह कंपनी विन्डोज मोबाईल (५ व ६) प्रोफ़ेश्नल के लिए हिन्दी इन्टरफ़ेस सॉफ़्टवेअर मुहैय्या करवाती है। कंपनी के जालस्थल से ही डाउनलोड (~2mb) किया जा सकता है, और वहीं से रजिस्ट्रेशन भी किया जा सकता है। आपको इमेल के द्वारा एक एक्टिवेशन कोड दिया जाएगा जिससे कि आप यह सॉफ़्टवेअर अपने फ़ोन में इस्तेमाल कर सकें।
मैने डाउनलोड, इंस्टाल और रजिस्ट्रेशन करने के पहले जालस्थल को थोड़ खंगाला और कुछ प्रश्न मेरे अंदर कुलबुलाए। जिसके कारण मैं आगे नहीं बढा। आप भी पढिए और सोचिये:
१. मुफ़्त का सॉफ़्टवेअर, अच्छी बात है।
२. डाउनलोड भी मुफ़्त, और अच्छी बात है।
३. रजिस्ट्रेशन भी मुफ़्त, बहुत अच्छी बात है।
४. हिन्दी इन्टरफ़ेस मिलेगा - सबसे अच्छी बात है।
५. कंपनी "इज़राईल" की है....!!! आंयं!!!!??!!??!
६. सॉफ़्टवेअर इंस्टाल करने पर आपके फ़ोन पर एक युनिक कोड मिलेगा, जिसे आपको कंपनी को भेजना पडेगा - रजिस्ट्रेशन के लिये..!!??!!
६. जालस्थल पर पता और फ़ोन नंबर तो है, पर किसी भी व्यक्ति का नाम नहीं है!!!
खुरापाती सोच:
१. आपके फोन की निजी जानकारी गलत हाथों में जा सकती है।
२. आपके फ़ोन का गलत इस्तेमाल हो सकता है - आपकी जानकारी के बिना आपके फ़ोन से मैसेज भेजे जा सकते हैं और तो और काल तक किए जा सकते हैं।
३. अधिकतर स्मार्टफ़ोन्स में GPS सुविधा होती है, यानि, आपकी सही सही स्थिति का पता लग सकता है - आपकी जानकारी के बिना।
४. ..और ना जाने क्या क्या (मैं आप पर छोड़ता हूँ)
Monday, March 23, 2009
फ़ुटबाल से दूरी
आखिरकार पिछले हफ़्ते फ़ुटबाल का वह टुर्नामेन्ट खतम हो गया जो पिछले दो महिनों से चल रहा था। वह था इंटर आई।टी. कम्पनी़ज़ फ़ुटबाल टुर्नामेन्ट, जो कोंढवा (पुणे) में "गो स्पोर्ट्स अकादमी" में चल रहा था।
मैदान था एकदम प्रथम दर्जे का, करीने से कटी हुई हरी घास से ढँका हुआ। और तो और फ़्लड लाईट्स से सुसज्जित। इंटर आई।टी. कम्पनी़ज़ टुर्नामेन्ट था तो मैच केवल शनिवार-रविवार ही होते थे। और फ़ायनल्स रात को।
एक ही प्रतियोगिता में 5-a-side, 7-a-side, 9-a-side और 11-a-side के मैचेस हुये। यानि कि खुब सारे मैच खेलने का मौका।
एक गोलकीपर के नाते मैने अपनी जिम्मेदारी कुछ हद तक निभाई और हमारी टीम 5-a-side और 7-a-side के फ़ायनल्स तक पहुँची और 11-a-side के सेमीफ़ायनल तक।
अंतिम परिणाम यह रहा कि हम लोग 5 & 7 a side में द्वितीय स्थान पर रहे और 11-a-side में चौथे स्थान से ही संतुष्ट रहना पड़ा।
अब एक बुरी खबर, अब कम से कम अगले 3 से 4 महिनों तक मैं फ़ुटबाल मैदान से दुर रहने वाला हूँ, कारण, मेरे कंधे की एक मांसपेशी में (बहुत) थोड़ा नुकसान हुआ है। चिकित्सीय भाषा में "सुप्रास्पाईनेटस मसल पार्शियल टीयर" हो गया है। डॉक्टर (ऑर्थोपीडीक) ने फ़ुटबाल मैदान, तैराकी से, यानि कि हर उस खेल से जिसमें कंधे का ज्यादा इस्तेमाल होता है, दूर रहने को कहा है। कोई दवा, कोई क्रीम नहीं सिर्फ़ "फ़िज़ियोथेरेपी कसरत" ही इलाज है। कम से कम दो महीने तो लगेंगे ही कंधे को ठीक होने में।
रोज फ़िज़ियोथेरेपिस्ट के पास जाना होता है कसरत करने और फ़िर घर पर (या ऑफ़िस में) भी करनी होती है। बहुत हल्की फ़ुल्की कसरत। मैं कुछ तो ऑ॓फ़िस में अपने कम्प्युटर के सामने अपनी कुर्सी पर बैठे बैठे ही कर लेता हूँ। बहुत धीरे धीरे सुधार होगा।
क्या किसी को कोई अनुभव है इस तरह का??
अरे भाई फ़ुटबाल का नहीं, "सुप्रास्पाईनेटस मसल टीयर" का।
हो तो अपने अनुभव जरुर बताईये और सलाह भी दीजिये।
मैदान था एकदम प्रथम दर्जे का, करीने से कटी हुई हरी घास से ढँका हुआ। और तो और फ़्लड लाईट्स से सुसज्जित। इंटर आई।टी. कम्पनी़ज़ टुर्नामेन्ट था तो मैच केवल शनिवार-रविवार ही होते थे। और फ़ायनल्स रात को।
एक ही प्रतियोगिता में 5-a-side, 7-a-side, 9-a-side और 11-a-side के मैचेस हुये। यानि कि खुब सारे मैच खेलने का मौका।
एक गोलकीपर के नाते मैने अपनी जिम्मेदारी कुछ हद तक निभाई और हमारी टीम 5-a-side और 7-a-side के फ़ायनल्स तक पहुँची और 11-a-side के सेमीफ़ायनल तक।
अंतिम परिणाम यह रहा कि हम लोग 5 & 7 a side में द्वितीय स्थान पर रहे और 11-a-side में चौथे स्थान से ही संतुष्ट रहना पड़ा।
अब एक बुरी खबर, अब कम से कम अगले 3 से 4 महिनों तक मैं फ़ुटबाल मैदान से दुर रहने वाला हूँ, कारण, मेरे कंधे की एक मांसपेशी में (बहुत) थोड़ा नुकसान हुआ है। चिकित्सीय भाषा में "सुप्रास्पाईनेटस मसल पार्शियल टीयर" हो गया है। डॉक्टर (ऑर्थोपीडीक) ने फ़ुटबाल मैदान, तैराकी से, यानि कि हर उस खेल से जिसमें कंधे का ज्यादा इस्तेमाल होता है, दूर रहने को कहा है। कोई दवा, कोई क्रीम नहीं सिर्फ़ "फ़िज़ियोथेरेपी कसरत" ही इलाज है। कम से कम दो महीने तो लगेंगे ही कंधे को ठीक होने में।
रोज फ़िज़ियोथेरेपिस्ट के पास जाना होता है कसरत करने और फ़िर घर पर (या ऑफ़िस में) भी करनी होती है। बहुत हल्की फ़ुल्की कसरत। मैं कुछ तो ऑ॓फ़िस में अपने कम्प्युटर के सामने अपनी कुर्सी पर बैठे बैठे ही कर लेता हूँ। बहुत धीरे धीरे सुधार होगा।
क्या किसी को कोई अनुभव है इस तरह का??
अरे भाई फ़ुटबाल का नहीं, "सुप्रास्पाईनेटस मसल टीयर" का।
हो तो अपने अनुभव जरुर बताईये और सलाह भी दीजिये।
Friday, March 06, 2009
मेरा नया खिलौना


काफ़ी समय से सोच रहा था, और फ़िर अब तो जरुरत भी पड़ गई| मैडम जो मेरा पुराना वाला अपने साथ इंदौर ले गईं| और उनके तो जल्दी आने की संभावना भी नहीं है - कम से कम मई तक तो नहीं|
तो मैंने मौके का फायदा उठा लिया और ले ही लिया - नया खिलौना। आप भी देखिये:
यहाँ रही ओफिशिअल कड़ी
शायद आपको भी पसंद आए!! :)
Saturday, January 31, 2009
क्या यह सपना है?
मुझे ऐसा लगता है कि हमारा तिरंगा सिकुड़ता जा रहा है शायद कुछ ही समय में दो तिहाई ही रह जाने वाला है ऊपर का एक तिहाई धीरे धीरे गलता जा रहा है नीचे के दो रंग ही रह जायेंगे अंतिम गति तो शायद आखिरी एक तिहाई तक जाकर ही थमने वाली है
काश, यह सपना ही हो! और कभी ऐसा दिन ना आए!!
काश, यह सपना ही हो! और कभी ऐसा दिन ना आए!!
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