Monday, May 24, 2010

प्लस? या मायनस?

अगर आपके पास कोई ऐसा अडाप्टर है जो एसी कर्रेंट को डीसी कर्रेंट (१.५ वोल्ट - १२ वोल्ट) में कन्वर्ट करता है, किन्तु उसके (दोनों) आउटपुट टर्मिनल्स पर कोई मार्किंग नहीं है जिससे कि यह पता चले कि कौन सा प्लस और कौन सा मायनस है, तो यह जानने का एक बहुत सरल तरीका है|

एक कांच के ग्लास में पानी भर लीजिये, और उसमे एक चम्मच नमक मिला लीजिये| अब इस ग्लास में अडाप्टर से निकले हुए दोनों टर्मिनल्स डुबा दीजिये| ध्यान रहे कि दोनों टर्मिनल्स के सिरे खुरचे हुएहों| और हाँ, दोनों टर्मिनल्स आपस में जुड़े हुए ना हों|

अब पॉवर ऑन कीजिये|

आप देखेंगे कि दोनों में से एक टर्मिनल में से बारीक बारीक बुलबुले से निकलने लगे हैं| बस| यही है आपका मायनस वाला टर्मिनल|

है ना सरल तरीका? एक पेन्सिल सेल से आप इसका प्रयोग कर के देख सकते हैं|

अब यह बुलबुले क्यों निकलते हैं, इसका जवाब तो कोई जानकार ही देगा|
आपको पता है क्या? तो बताइये ना...

5 comments:

Udan Tashtari said...

यह अच्छा तरीका बता दिया. धन्यवाद!

पगला said...

shriman ji, bulbule to dono tarminals se niklenge lekin minus(-) wale se jyada nikalenge aur plus(+) wale se kam niklenge kyoki current dene par pani (H2O) hydrogen (H2) aur oxygen(O2) me bant jata hai, minus pe hydrogen aur plus pe oxygen ikattha hone lagtee hai.
khas bat: agar aap kisi jugad se is minas wali gas ( hydrogen) ko baloon me bhar le to wo bahut hi shandar aur safe patakha ban jayega. yani use aag dikhaiye, shandar dhamaka aur roshni hogi bt koi nukshan nahee hoga. ais aisliye hota hai ki hydrogen khud to kafee teji se ajlteee hai lekin doosaro ko nahee jalatee.

विजय वडनेरे said...

@pagla ji:
aap itne bhi pagla ji types nahi hain :)
waah achhi jaankaari di.
dhanyawad.

Ria said...

good post.. but why so many useless advertizing comments..

Akshita (Pakhi) said...

अच्छा तरीका है....बढ़िया लगा.
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'पाखी की दुनिया' में अब सी-प्लेन में घूमने की तैयारी...