Friday, July 04, 2008

मैं चाहता हूँ

मैं चाहता हूँ, फ़िर से...

- ढेर सारी कॉमिक्स पढना...
- दोस्तों के साथ खेलना...
- बारीश में भीगना...
- कागज़ की नाव बनाकर बहते हुये पानी में तैराना...
- सायकल पर स्टंट्स करना...
- सायकल खोल-खाल कर फ़िर से कसना...
- खुब खुब फ़ुटबाल खेलना...
- किसी पहाड़ पर चढना...
- खुब सारा तैरना...
- रेत में घरोंदे बनाना...
- पैराशुट बना कर उडाना...
- चित्रकारी करना...
- मिट्टी से मुर्तियाँ बनाना...
- गत्ते से घर बनाना...
- तार-मोटर वगैरह जोड कर सर्किट-मॉडल्स बनाना...
- दशहरे के रावण का पुतला बनाना...
- एल्युमिनियम के तार को मोड़ कर मॉडल्स बनाना...
- गुलेल बनाना...
- खिडकियों को ढँक कर कमरे में प्रोजेक्टर से फ़िल्म चलाना...
- धनुष-बाण बना कर चलाना...
या फ़िर कभी "कुछ भी" ना करना...

आप क्या चाहते हैं?

1 comment:

Anjul Sahu said...

मैं भी वो हर चीज करना चाहता हूँ जो बचपन में किया करता था खासकर
- पतंग उडाना
- पिचकारियों में रंग भर कर छत से लोगो को भिगाना
- दिवाली के १५ दिन पहले से पटाखे छोड़ना
- अपनी कापियों के पन्नो के प्लेन बना कर उड़ना या फ़िर उस पर कलाकारियां करना
- अपने घर की अलमारी को चम्मचों से बजाना
और भी बहुत कुछ ...

- अंजुल