Monday, April 27, 2009

विज्ञापनो की हिन्दी और हमारा मस्तिष्क

आजकल टी.वी. प्रसारित होने वाले दो विज्ञापन मुझे थोड़े खटक रहे हैं। दरअसल उसमें बोली गई हिन्दी में मुझे लगता है कि थोड़ी गड़बड़ है। या तो वाक्य गलत बनाये हुये हैं या फ़िर बोलने में सही जगह विराम या सही जगह ज़ोर नहीं दिया गया है, इसलिये (मुझे) वे वाक्य गलत लगते हैं।

पहला:

एक शीतपेय का है, जिसमें एक कलाकार (डबल रोल में) तमाम तरह के स्टंट्स करता हुआ शीतपेय के फ़्रिज तक पहुँचता है। पर जाने से पहले एक वाक्य बोला जाता है -

...बिना पैर जमीं पर रख के....

यहाँ आशय यह है कि ..चलो शीतपेय की बोतल ले आते हैं, पर पैर जमींन पर रखे बिना।
बोलते समय कलाकार "बिना पैर" के बाद विराम लेता है और फ़िर आगे बोलता है "जमीं पर.."
यानि कि - ."बिना पैर, जमीं पर..."

जबकि मेरे ख्याल से होना ऐसा चहिये कि - "बिना, पैर जमीं पर...."

दूसरा:

किसी तो क्रिम का है शायद। एक अदाकारा अपनी नाक में नथ लगाते हुए दूसरी से कहती है -
...अगर हम ये पार्टी में पहनेंगे तो.....

आशय होता है - कि पार्टी में ये वाली नथ पहनेंगे तो....

मगर बिना विराम और गलत जगह जोर देने के कारण, (मुझे) सुनाई देता/लगता है - ..अगर हम, ये पार्टी में पहनेंगे तो...

इसकी जगह अगर वे ऐसा कहते - "...अगर हम पार्टी में ये पहनेंगे तो...." तो वाक्य एकदम साफ़ समझ में आता।

आप क्या कहते हैं?

मुझे मानवीय मस्तिष्क की एक बड़ी दिलचस्प करामात याद आ रही है। जिसमें इंसानी दिमाग़ किसी चीज़ को देख/सुन/पढ़ कर उससे जुड़ी या उससे संबंधित उसके आगे पीछे की चीज़ की कल्पना कर लेता है और आधी-अधुरी अथवा गलत सूचना को भी सही समझकर काम चला लेता है।

और शायद इसी के चलते हम शब्दों को जोड़कर, भले ही वे थोड़े गलत क्रमांक में हो, सही वाक्य की कल्पना कर लेते हैं, अथवा समझ लेते हैं।

चलिये एक/दो उदाहरण देता हूँ: नीचे लिखे अंग्रेजी के दो वाक्य हैं। बिना ज्यादा ध्यानकेंद्रीत किये हुये उन पर नज़र घुमाईये। और देखिये की क्या लिखा है।

- hlleo, my nmae is vjiay.

- We are paleesd wtih the Hnoorubale Baord's dcesioin and we arpeacpite the percoss bineg fllooewd.

मुझे उम्मीद है आपमे से अधिकतर (जिनके लिये अंग्रेजी पढना आम बात है) ने इन वाक्यों को पढ/समझ लिया होगा। यह जानते हुये भी कि सारे शब्दों के हिज्जे गलत हैं। बस हर शब्द का पहला और अंतिम अक्षर ही अपनी जगह पर है।

देखा आपने यही है हमारे दिमाग का कमाल।

परंतु जब मैने यही प्रयोग, हिन्दी के वाक्य के साथ बनाना चाहा तो बना ना पाया, क्योंकि, हिन्दी के अधिकतर शब्द २ या तीन अक्षरों के ही मि

अब एक प्रयोग करके देखते हैं जो मैं भी पहली बार ही करुंगा। यही उपर वाला प्रयोग, हिन्दी के शब्दों के साथ करते हैं:
- अक्रनुमांक
- अवांनुशिक
- अतधिकर
- हदमम
- यसंभथाव

क्या आप इन्हें पहली बार में सही पकड़ पाये?? ज्यादा ध्यान केंद्रित किये बिना?
बताईयेगा ज़रुर!!

अंत में: I tired to from a hnidi stncneee of taht nutrae, but condlut, as msot of the hndii wrods are trhee ltetered olny. :(

4 comments:

RAJNISH PARIHAR said...

कमाल है आप टी वी देखते हुए भी इतने सक्रिय रहते है..यही है इंडिया का असली दिमाग..

RAJNISH PARIHAR said...

Amazing , you also see the active live .. so that's the real brains of India ..

Dr. Smt. ajit gupta said...

बहुत ही रुचिकर जानकारी। यही तो हैं कि हम मनोरंजन के समय भी ज्ञान को महत्‍व देते हैं।

पगला said...

anukramank aur ytha sambhaw maine sahee padha tha